पहली बार डिफेंस टेक्नॉलजी के ट्रांसफर की प्राइवेट सेक्टर को परमिशन

नई दिल्ली

रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए डिफेंस टेक्नॉलजी प्राइवेट सेक्टर को ट्रांसफर करने के DRDO के प्रपोजल को मंजूरी दे दी है। हालांकि तकनीक के हस्तांतरण की अभी यह मंजूरी ‘लार्सन ऐंड टूब्रो’ कंपनी को पायलट रहित ‘लक्ष्य’ विमान बनाने के लिए दी गई है लेकिन रक्षा क्षेत्र के जानकार इसे एक बड़ा कदम बता रहे हैं।
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इस मंजूरी का एक आर्थिक पहलू भी है। L&T हर ‘लक्ष्य’ विमान के उत्पादन और बिक्री पर ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) को इसके लिए रॉयल्टी देगा। अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक लक्ष्य को खरीदने में विदेशी सेनाओं को दिलचस्पी हो सकती है और संभावित खरीदारों की इस लिस्ट में सिंगापुर, मलयेशिया और इस्राइल जैसे देशों के नाम हैं।

L&T को दी गई मंजूरी में एक शर्त यह भी जोड़ी गई है कि कंपनी को विदेश में ‘लक्ष्य’ बेचने के लिए रक्षा मंत्रालय से इजाजत लेनी होगी। चालक रहित लक्ष्य विमान को DRDO की बेंगलुरु स्थित ‘एयरोनॉटिकल डिवेलपमेंट इस्टैबलिशमेंट’ एजेंसी ने विकसित किया है।

साल 2000 में पहली बार इसे वायु सेना में शामिल किया गया था जबकि नेवी और आर्मी ने 2001 और 2003 में इसे अपनाया। गैस टर्बाइन इंजन से चलने वाले इस विमान को जमीन या पानी से लॉन्च किया जा सकता है।

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